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Patna पटना। जमुई में नाबालिग लड़की और उसके साथी के साथ छेड़खानी, अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में पीड़िता तथा उसके परिजनों की तस्वीर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पटना के सचिवालय थाने में आवेदन दिया गया है। आवेदन सचिवालय थाने में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक अमिता कुमारी की ओर से 25 सितंबर को शिकायत पत्र दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि 19 सितंबर को जमुई जिले में एक नाबालिग लड़की और उसके साथी के साथ छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट की घटना हुई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जमुई में विधि-सम्मत कार्रवाई की गई।
#WATCH | पटना, बिहार | राजद सांसद मीसा भारती ने कहा, "पटना का पॉश इलाका, सचिवालय थाना, एक जनप्रतिनिधि, संसद की महिला सदस्य, पांच घंटे से यहां बैठी है कि हमारी FIR दर्ज कर लीजिए लेकिन जितने भी अंदर अधिकारी बैठे हैं, 'टस्स से मस्स' नहीं हो रहे हैं। बार-बार हम कह रहे हैं कि 'X'… https://t.co/b78l3ryrXZ pic.twitter.com/1pqgXiMuOn
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 25, 2026
आवेदन के मुताबिक, 25 सितंबर को सूचना मिली कि इस घटना की पीड़िता और उसके परिजनों की एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपलोड की गई है। इसके बाद यह पोस्ट दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित और वायरल हो गई, जिससे मामले से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक होने की स्थिति पैदा हुई। आवेदन में कहा गया है कि पोस्ट वायरल होने से नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की निजता एवं गरिमा प्रभावित होने तथा पीड़िता की पहचान उजागर होने की आशंका पैदा हुई। आवेदन में इसे लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के उल्लंघन का मामला बताया गया है।
पुलिस अधिकारी की ओर से दिए गए आवेदन में दावा किया गया है कि सत्यापन के दौरान पीड़िता की तस्वीर एक्स पर अपलोड करने का संबंध सीएमओ कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद से पाया गया। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सागर प्रसाद के साथ-साथ संबंधित पोस्ट को आगे प्रसारित या वायरल करने वाले अन्य व्यक्तियों और सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन में उपलब्ध तथ्यों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।
जनता से रिश्ता इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। यह जानकारी जनस्रोतों और सोशल मीडिया माध्यमों से प्राप्त हुई है।
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